MP Kamdhenu Niwas Policy 2025 Lagu: मध्यप्रदेश में “स्वावलंबी गौशालाएं (कामधेनु निवास) स्थापना नीति-2025” लागू कर दी गई है। इस नीति के तहत 5,000 गोवंश के लिए अधिकतम 130 एकड़ भूमि देने का प्रावधान है। जानिए क्या है योजना का उद्देश्य, किसानों को क्या लाभ मिलेगा और निवेशकों के लिए क्या अवसर बनेंगे।
MP Kamdhenu Niwas Policy 2025 Lagu: मध्यप्रदेश में स्वावलंबी गौशालाएं नीति-2025 लागू, 5,000 गोवंश के लिए 130 एकड़ भूमि का प्रावधान
मध्यप्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को नई दिशा देने के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। राज्य में अब “स्वावलंबी गौशालाएं (कामधेनु निवास) स्थापना नीति-2025” लागू कर दी गई है। सरकार इसे प्रदेश में श्वेत क्रांति को मजबूत करने वाली पहल के रूप में देख रही है। इस नीति के जरिए मकसद सिर्फ गौवंश के लिए आश्रय बनाना नहीं है, बल्कि गौशालाओं को इस तरह विकसित करना है कि वे खुद अपने खर्च निकाल सकें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकें।
इस नीति के लागू होने के बाद अब प्रदेश में गौवंश के संरक्षण के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन, जैविक खेती और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की तैयारी भी तेज हो जाएगी। खास बात यह है कि इस योजना में बड़े स्तर पर परियोजनाएं लगाने वालों को भी अवसर देने की बात कही गई है, जिससे निजी निवेश और आधुनिक सुविधाओं के साथ काम आगे बढ़ सके।
MP Kamdhenu Niwas Policy 2025 Lagu: क्या है “कामधेनु निवास” नीति का मुख्य उद्देश्य?
सरकार का साफ संकेत है कि गौशालाएं केवल सहायता या दान पर न टिकें। लंबे समय से कई गौशालाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या यही रही है कि पशुओं की देखरेख का खर्च बढ़ता जाता है, लेकिन आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं बन पाता। ऐसे में कई जगह व्यवस्थाएं कमजोर हो जाती हैं और गौवंश संरक्षण की पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है।
इसी वजह से नई नीति में जोर “स्वावलंबी मॉडल” पर दिया गया है। यानी ऐसी गौशालाएं जहां सिर्फ पशुओं को रखना ही नहीं, बल्कि दूध उत्पादन, गोबर-आधारित उत्पाद और जैविक गतिविधियों के जरिए नियमित आमदनी भी हो सके। इससे एक तरफ गौवंश की बेहतर देखभाल होगी और दूसरी तरफ गांवों में रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
MP Kamdhenu Niwas Policy 2025 Lagu: 5,000 गोवंश के लिए अधिकतम 130 एकड़ भूमि
इस नीति की सबसे चर्चित बात यह है कि राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर गौशाला परियोजनाओं को लेकर स्पष्ट प्रावधान तय किए हैं। योजना के अनुसार, अगर कोई संस्था या निवेशक 5,000 गोवंश की क्षमता वाला कामधेनु निवास स्थापित करना चाहता है, तो इसके लिए अधिकतम 130 एकड़ भूमि दिए जाने की व्यवस्था रखी गई है।
यानी यह पहल सिर्फ छोटी गौशालाओं तक सीमित नहीं होगी। सरकार चाहती है कि बड़े स्तर पर व्यवस्थित और आधुनिक मॉडल तैयार हों, जिनसे पूरे क्षेत्र को फायदा मिल सके। इससे प्रदेश में गाय-पालन और डेयरी सेक्टर भी मजबूत हो सकता है।
MP Kamdhenu Niwas Policy 2025 Lagu: हर 1,000 गोवंश बढ़ने पर अतिरिक्त जमीन का विकल्प
नीति में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसमें कहा गया है कि अगर परियोजना में गोवंश की संख्या बढ़ाई जाती है, तो भूमि का दायरा भी बढ़ सकता है। सरकार के मुताबिक हर 1,000 गोवंश की वृद्धि पर 25 एकड़ अतिरिक्त भूमि का प्रावधान रखा गया है।
इसका मतलब यह है कि जो निवेशक या संस्था 5,000 से ज्यादा गोवंश के लिए परियोजना बढ़ाना चाहेंगे, उन्हें भी नीतिगत रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। यही वजह है कि इस योजना को “बड़े विज़न” वाली योजना माना जा रहा है।
✅ प्रमुख प्रावधान
अधिकतम 130 एकड़ भूमि उपयोग/आवंटन का प्रावधान
कम से कम 5,000 गोवंश के पालन हेतु
✅ भूमि विस्तार का नियम
- प्रत्येक 1,000 गोवंश की वृद्धि पर 25 एकड़ अतिरिक्त भूमि का प्रावधान
यह प्रावधान बड़े निवेश और बड़े मॉडल की संभावनाओं को बढ़ाता है, जिससे प्रदेश में बड़े स्तर पर आधुनिक गौशालाएं विकसित हो सकती हैं।
MP Kamdhenu Niwas Policy 2025 Lagu: गौशालाएं कैसे बनेंगी स्वावलंबी?
कामधेनु निवास मॉडल में केवल पशुओं को आश्रय देना प्राथमिक लक्ष्य है, लेकिन इसके साथ-साथ आय के स्त्रोत भी तैयार करने पर ध्यान दिया गया है। सरकार का इरादा है कि गौशालाओं में डेयरी गतिविधियों को बढ़ाया जाए ताकि दूध उत्पादन बढ़े और उससे होने वाली कमाई गौवंश की देखभाल में मदद करे।
इसके अलावा गोबर आधारित जैविक खाद, बायोगैस, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य उपयोगी उत्पादों के जरिए भी आय संभव है। जैविक खेती के बढ़ते बाजार को देखते हुए यह हिस्सा भविष्य में गौशालाओं के लिए मजबूत कमाई का माध्यम बन सकता है। अगर योजना सही तरीके से लागू हुई, तो गौशालाएं सिर्फ खर्च का केंद्र नहीं रहेंगी, बल्कि ग्रामीण विकास का मॉडल बनकर सामने आ सकती हैं।
✅ समेकित (Integrated) मॉडल की संभावित गतिविधियां:
सौर ऊर्जा आधारित सिस्टम
दूध उत्पादन और डेयरी यूनिट
दूध से घी/दही/पनीर जैसे उत्पाद
गोबर से जैविक खाद (Organic Manure)
गोमूत्र से जैविक कीटनाशक
बायोगैस प्लांट
वर्मी कम्पोस्ट
किसानों और गांवों को क्या लाभ मिलेगा?
इस नीति से सबसे ज्यादा फायदा गांवों को मिलने की उम्मीद है। पशुपालन का विस्तार होने से दूध उत्पादन बढ़ेगा और डेयरी व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। कई इलाकों में किसान आज भी पशुपालन को सहायक आय मानकर करते हैं, लेकिन अगर बड़े मॉडल विकसित होते हैं, तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का बड़ा साधन बन सकता है।
दूसरी तरफ जैविक खाद और गोबर-आधारित उत्पाद किसानों की खेती की लागत कम कर सकते हैं। इससे किसान रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाकर प्राकृतिक खेती की ओर भी बढ़ सकते हैं, जिसका लाभ लंबे समय में मिट्टी और उत्पादन दोनों को मिलेगा।
निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह नीति?
नई नीति में निवेशकों को स्पष्ट अवसर दिया गया है। यह योजना उन संस्थाओं के लिए भी आकर्षक बन सकती है जो डेयरी, बायोगैस, जैविक खेती या ग्रामीण क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट शुरू करना चाहते हैं। सरकार का संकेत है कि कामधेनु निवास को व्यवस्थित परियोजना के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे निजी भागीदारी बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर यह नीति सामाजिक उद्देश्य के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को जोड़ने वाली बन सकती है। अगर इसका संचालन सही मॉडल के साथ हुआ, तो यह राज्य के पशुपालन सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकती है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में लागू हुई स्वावलंबी गौशालाएं (कामधेनु निवास) नीति-2025 सिर्फ एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन के लिए एक नई दिशा मानी जा रही है। 5,000 गोवंश के लिए 130 एकड़ भूमि और हर 1,000 गोवंश पर अतिरिक्त भूमि का प्रावधान इस नीति को बड़ा और असरदार बनाता है। अब सबकी नजर इस पर रहेगी कि यह नीति जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से लागू होती है और इससे गांवों में कितनी नई संभावनाएं बनती हैं।
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