Mahashivratri 2026 Most Powerful Nishita Kaal: Mahashivratri 2026 के पावन अवसर पर निशिता काल का यह 50 मिनट का महा शुभ समय बेहद दुर्लभ माना जाता है। जानिए सही पूजा मुहूर्त, चारों प्रहर पूजा विधि, व्रत नियम और पारण समय। इस दिव्य काल में श्रद्धा से किया गया शिव पूजन मनोकामनाएँ पूर्ण कर सकता है और जीवन में शिव की विशेष कृपा दिला सकता है।
Mahashivratri 2026 Most Powerful Nishita Kaal: शिव-शक्ति के दिव्य मिलन की पावन रात्रि, जानिए पूजा मुहूर्त, व्रत विधि और आध्यात्मिक महत्व
महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म के सबसे महान और रहस्यमय पर्वों में से एक है। यह केवल एक त्योहार नहीं बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन, अज्ञान से ज्ञान की ओर यात्रा और भीतर की चेतना को जागृत करने का अवसर है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। इस रात्रि को वह दिव्य क्षण माना जाता है जब शिव तत्व सबसे अधिक जागृत होता है और साधना शीघ्र फलदायी होती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी पावन रात्रि में भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे, और शिव-पार्वती का दिव्य विवाह भी इसी तिथि से जुड़ा माना जाता है। इसलिए यह दिन वैवाहिक सुख, आध्यात्मिक उन्नति और पापों से मुक्ति प्रदान करने वाला माना गया है।
Mahashivratri 2026 Most Powerful Nishita Kaal: महाशिवरात्रि 2026 पूजा का विशेष मुहूर्त
- महाशिवरात्रि तिथि: रविवार, 15 फरवरी 2026
- निशिता काल पूजा: 12:16 AM – 01:06 AM (16 फरवरी)
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, शाम 05:04 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2026, शाम 05:34 बजे
- शिवरात्रि पारण समय: 16 फरवरी, सुबह 06:59 AM से दोपहर 03:32 PM
रात्रि के चार प्रहर पूजा समय
- प्रथम प्रहर: 06:23 PM – 09:32 PM
- द्वितीय प्रहर: 09:32 PM – 12:41 AM
- तृतीय प्रहर: 12:41 AM – 03:50 AM
- चतुर्थ प्रहर: 03:50 AM – 06:59 AM
निशिता काल को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यही वह समय है, जब शिव तत्व की ऊर्जा चरम पर होती है।

Mahashivratri 2026 Most Powerful Nishita Kaal: महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
महाशिवरात्रि अंधकार में प्रकाश की खोज का प्रतीक है। शिव का अर्थ है,कल्याण और शुद्ध चेतना। यह रात्रि ध्यान, जप और तपस्या के लिए अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है। कहा जाता है कि इस रात जागरण करने और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र जपने से मन की अशुद्धियाँ दूर होती हैं और चेतना उच्च स्तर पर पहुँचती है।
योग परंपरा में इस रात्रि को शरीर की ऊर्जा ऊपर की ओर प्रवाहित होती है, इसलिए पूरी रात जागकर ध्यान करना अत्यंत लाभदायक माना गया है।
Mahashivratri 2026 Most Powerful Nishita Kaal: शिव-पार्वती विवाह का आध्यात्मिक संदेश
शिव और पार्वती का विवाह केवल पौराणिक कथा नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है। शिव का वैराग्य और पार्वती की भक्ति मिलकर यह संदेश देते हैं कि जीवन में संतुलन आवश्यक है। तप और प्रेम, ज्ञान और शक्ति — दोनों का संगम ही पूर्णता देता है। इसलिए महाशिवरात्रि को विवाह योग्य कन्याएँ विशेष श्रद्धा से मनाती हैं।
Mahashivratri 2026 Most Powerful Nishita Kaal: महाशिवरात्रि व्रत विधि –

व्रत विधि और पूजा प्रक्रिया
महाशिवरात्रि व्रत एक दिन पहले त्रयोदशी से आरंभ माना जाता है। इस दिन भक्त केवल एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। शिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। दिनभर फलाहार या निर्जल व्रत रखा जाता है। सायंकाल स्नान के बाद मंदिर या घर में स्थापित शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।
अभिषेक में जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का प्रयोग किया जाता है। बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प और चंदन अर्पित करना शुभ माना जाता है। “ॐ नमः शिवाय” और “महामृत्युंजय मंत्र” का जप अत्यंत फलदायी माना गया है। रात्रि जागरण कर भजन, शिव चालीसा, रुद्राष्टक का पाठ किया जाता है।
🔹 एक दिन पहले (त्रयोदशी)
- केवल एक समय सात्विक भोजन करें
- नशा, लहसुन-प्याज से परहेज रखें
🔹 शिवरात्रि के दिन
- प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें
- दिनभर फलाहार या निर्जल व्रत रखें
- मन में शिव स्मरण और मंत्र जप करें
🔹 सायंकाल पूजा
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें
- बेलपत्र, धतूरा, आक, चंदन और सफेद पुष्प अर्पित करें
🔹 रात्रि जागरण
- चारों प्रहर पूजा करें
- शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र और रुद्राष्टक पाठ करें
🔹 व्रत पारण (अगले दिन)
- स्नान के बाद शिव पूजा करें
- ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं
- स्वयं सात्विक भोजन ग्रहण करें
Note – व्रत पारण का समय 16 फरवरी को सुबह 6:59 बजे से दोपहर 3:32 बजे तक रहेगा।
महाशिवरात्रि पर क्या करना चाहिए
✔ “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप
✔ रुद्राभिषेक
✔ गरीबों को अन्न और वस्त्र दान
✔ ध्यान और मौन साधना
❌ क्या नहीं करना चाहिए
✖ क्रोध, विवाद, नकारात्मक विचार
✖ मांसाहार, नशा
✖ दिन में सोना
महाशिवरात्रि का ज्योतिषीय लाभ
इस दिन व्रत रखने से:
- कालसर्प दोष शांति
- विवाह में आ रही बाधाएँ दूर
- मानसिक तनाव से मुक्ति
- आध्यात्मिक उन्नति
- पितृ दोष शांति
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
आधुनिक योग विज्ञान के अनुसार, इस दिन ग्रह स्थिति ऐसी होती है जिससे रीढ़ सीधी रखकर ध्यान करने से ऊर्जा ऊपर उठती है। इसलिए प्राचीन ऋषियों ने इस रात जागरण की परंपरा शुरू की।
निष्कर्ष
महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि चेतना जागरण की दिव्य रात्रि है। यह आत्मा को शिव तत्व से जोड़ने का अवसर है। श्रद्धा, संयम और भक्ति से किया गया व्रत जीवन में शांति, सफलता और आध्यात्मिक संतुलन लाता है।
हर हर महादेव! 🔱
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