Ekadashi Vrat Aahaar Niyam Guide 2026: Ekadashi Vrat Diet Guide – एकादशी व्रत में फलाहार, नक्तआहार, दूध, चाय-कॉफी, साबूदाना, आलू, पनीर और दवाइयों से जुड़ी पूरी जानकारी सरल हिंदी में। जानिए व्रत सही तरीके से कैसे रखें।
Ekadashi Vrat Aahaar Niyam Guide 2026: एकादशी व्रत/ उपवास में क्या खाएं और किन चीज़ों से बचें
एकादशी का व्रत केवल भूखे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह मन, वाणी और शरीर की शुद्धि का विशेष दिन होता है। उत्तर भारत ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में भगवान विष्णु के भक्त एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा और नियम के साथ रखते हैं।
लेकिन आज के समय में सबसे बड़ा सवाल यही होता है –
“व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं?”
धार्मिक ग्रंथों में एकादशी व्रत को बहुत ही संयम और अनुशासन से जुड़ा बताया गया है। व्रत करते समय व्यक्ति अपनी इच्छाशक्ति, स्वास्थ्य और परिस्थितियों के अनुसार संकल्प ले सकता है।
Ekadashi Vrat Aahaar Niyam Guide 2026: एकादशी व्रत के चार प्रमुख प्रकार
शास्त्रों में एकादशी व्रत को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में बांटा गया है।
पहला – जलाहार व्रत
इस व्रत में दिनभर केवल जल ग्रहण किया जाता है। निर्जला एकादशी पर अधिकतर श्रद्धालु इसी नियम का पालन करते हैं, लेकिन इच्छा होने पर अन्य एकादशियों में भी यह व्रत किया जा सकता है।
दूसरा – क्षीरआहार व्रत
इसमें दूध और दूध से बने शुद्ध पदार्थों का सेवन किया जाता है। यहां क्षीर का अर्थ केवल दूध ही नहीं, बल्कि दही, छाछ, मक्खन और घी जैसे गो-दुग्ध से बने पदार्थ भी हैं।
तीसरा – फलाहारी व्रत
फलाहार सबसे प्रचलित तरीका है। इसमें केला, सेब, अंगूर, अनार, नारियल, बादाम, काजू जैसे शुद्ध फल और मेवे लिए जाते हैं। इस दौरान हरी पत्तेदार सब्ज़ियों और अनाज से दूरी रखी जाती है।
चौथा – नक्तआहार व्रत
इस व्रत में दिनभर उपवास रखकर सूर्यास्त से पहले केवल एक बार फलाहार किया जाता है। इस भोजन में गेहूं, चावल, दाल, सेम जैसे अनाज बिल्कुल शामिल नहीं होते।

Ekadashi Vrat Aahaar Niyam Guide 2026: नक्तभोजी व्रत में क्या खाया जा सकता है?
नक्तभोजी व्रत में आमतौर पर साबूदाना, सिंघाड़ा, शकरकंद, आलू और मूंगफली का प्रयोग किया जाता है।
कई घरों में कुट्टू का आटा और सामक चावल भी उपयोग में लाए जाते हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इन्हें अर्ध-अन्न माना गया है। इसलिए जो श्रद्धालु शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हैं, वे इनसे परहेज़ करते हैं।
Ekadashi Vrat Aahaar Niyam Guide 2026: उपवास का सही अर्थ क्या है?
एकादशी उपवास कोई उत्सव नहीं, बल्कि तप और आत्मसंयम का दिन होता है। व्रत के दौरान अधिक स्वादिष्ट या भारी भोजन करना व्रत की भावना के विपरीत माना जाता है। उतना ही खाएं, जिससे शरीर स्वस्थ रहे और भगवान विष्णु के स्मरण में मन लगा रहे।
Ekadashi Vrat Aahaar Niyam Guide 2026: एकादशी में चाय-कॉफी पी सकते हैं या नहीं?
आज के समय में यह सवाल लगभग हर घर में उठता है।
कॉफी और ब्लैक कॉफी
कॉफी फल के बीज से बनती है, लेकिन इसे फली वर्ग में रखा जाता है। साथ ही इसमें कैफीन अधिक मात्रा में होता है, जिसे व्रत के दौरान उचित नहीं माना जाता। इसलिए एकादशी के दिन कॉफी से बचना ही बेहतर है।
कोको पाउडर और चॉकलेट
कोको भी फली वर्ग में आता है। इसी कारण चॉकलेट, कोको ड्रिंक या चॉकलेट से बनी कोई भी चीज़ व्रत में नहीं लेनी चाहिए।
चाय (दूध वाली या काली)
चाय पौधे की सूखी पत्तियों से बनती है। धार्मिक रूप से इसका स्पष्ट निषेध नहीं है, लेकिन इसमें कैफीन होने के कारण इसे व्रत में न लेने की सलाह दी जाती है।
हाँ, अगर चाय न पीने से सिरदर्द या कमजोरी होती है, तो सीमित मात्रा में चाय पीना व्रत भंग नहीं करता।
क्या एकादशी में पनीर खा सकते हैं?
यह सवाल उत्तर भारत में खासतौर पर बहुत पूछा जाता है।
हालांकि पनीर दूध से बनता है, लेकिन वैष्णव परंपरा में एकादशी के दिन पनीर का सेवन वर्जित माना गया है।
इसी तरह छेना से बनी मिठाइयाँ – रसगुल्ला, रस मलाई, खीरमोहन – भी व्रत में नहीं खाई जातीं।
वहीं दूसरी ओर दही, छाछ, मक्खन, घी और खोया जैसे शुद्ध गो-दुग्ध उत्पाद एकादशी में स्वीकार्य हैं।
भैंस या बकरी का दूध?
धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी व्रत में गो-दुग्ध को सर्वोत्तम माना गया है।
भैंस और बकरी के दूध से यथासंभव परहेज़ करना चाहिए।
दवाइयाँ और विटामिन सप्लीमेंट
अगर आप नियमित एलोपैथी दवाइयाँ लेते हैं, तो व्रत से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।
आवश्यक दवा लेना व्रत भंग नहीं करता।
लेकिन विटामिन सप्लीमेंट, च्यवनप्राश और बीजों से बने हेल्थ प्रोडक्ट्स व्रत के दिन न लेना ही उचित माना जाता है।
कृत्रिम शरबत और तैयार पेय
कृत्रिम शरबत में कृत्रिम रंग, रसायन और स्टेबलाइज़र होते हैं। इसलिए ऐसे शरबत पीने की मनाही होती है।
एकादशी उपवास में नीबू पानी का सादा शरबत, प्राकृतिक फल, नारियल पानी या सादा दूध ही लेना श्रेष्ठ माना गया है।
निष्कर्ष
एकादशी व्रत नियमों से ज़्यादा भाव और श्रद्धा का विषय है।
हर व्यक्ति अपनी क्षमता और भक्ति के अनुसार व्रत करता है।
सबसे जरूरी है – मन को शुद्ध रखना, संयम रखना और भगवान विष्णु का स्मरण करना।
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