Ekadashi Vrat 2025: जानिए एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व, इसके नियम, कथा और कैसे यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और स्वास्थ्य लाभ देता है।
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह व्रत प्रत्येक माह में दो बार, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। शास्त्रों में एकादशी को “पापों का नाश करने वाली” और “मोक्ष प्रदान करने वाली” तिथि कहा गया है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के भक्तों के लिए यह व्रत अनिवार्य माना गया है। पद्मपुराण, स्कंदपुराण और विष्णुधर्मोत्तर में एकादशी की महिमा विस्तार से बताई गई है।
Ekadashi Vrat 2025: एकादशी का धार्मिक महत्व
एकादशी को भगवान विष्णु की उपासना का दिन कहा जाता है। पुराणों के अनुसार स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता में बताया कि एकादशी का व्रत सभी व्रतों में श्रेष्ठ है।
- यह व्रत पापों का नाश करता है।
- आत्मा को शुद्ध करने में सहायक है।
- मोक्ष और भक्ति मार्ग में आगे बढ़ने का माध्यम है।
एकादशी व्रत केवल उपवास ही नहीं बल्कि आत्मसंयम और अध्यात्म का साधन भी है। इस दिन उपवास करने वाला व्यक्ति अन्न, चावल और तामसिक भोजन से दूर रहता है। अधिकतर लोग फलाहार और दूध का सेवन करते हैं। यह व्रत प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा से आरंभ होता है। पूजा के दौरान तुलसी पत्र चढ़ाना विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
Ekadashi Vrat 2025: एकादशी व्रत की विधि
- प्रातः स्नान करके संकल्प लें।
- घर में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र पर गंगाजल छिड़कें।
- पीले फूल, तुलसी पत्र और धूप-दीप अर्पित करें।
- दिनभर फलाहार या निर्जल व्रत रखें।
- रात्रि को भजन-कीर्तन करें और भगवान का ध्यान करें।
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Ekadashi Vrat 2025: एकादशी व्रत की पूजा विधि
एकादशी व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले स्नान करके होती है। स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा विधि इस प्रकार है:
प्रातःकालीन पूजा
• गंगाजल या स्वच्छ जल से स्नान।
• घर के मंदिर में दीप प्रज्वलन।
• पीले फूल और तुलसी दल अर्पण।
• विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ।
दिनभर का नियम
• पूरे दिन फलाहार या निर्जल व्रत।
• ब्रह्मचर्य का पालन।
• भजन-कीर्तन और कथा श्रवण।
संध्या पूजा
• भगवान विष्णु की आरती।
• तुलसी के पौधे की पूजा।
• दान और जरूरतमंद को अन्न देना।
आधुनिक दृष्टि से भी एकादशी व्रत का बहुत महत्व है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि उपवास से शरीर की पाचन क्रिया को आराम मिलता है और यह शरीर को डिटॉक्स करता है। इसीलिए इसे स्वास्थ्य लाभकारी माना गया है।
एकादशी व्रत की कथाओं में प्रायः यही बताया गया है कि इस व्रत से साधक को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति और ईश्वर की कृपा मिलती है।
साल 2025 में कुल 24 एकादशियाँ पड़ेंगी, और हर एकादशी की अपनी विशेष कथा और महत्व है – जैसे निर्जला एकादशी, देवशयनी एकादशी, देवउठनी एकादशी आदि।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: क्या एकादशी पर अनाज खाना मना है?
👉 हाँ, धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन अनाज वर्जित है। केवल फल, दूध और सात्विक आहार ही लेना चाहिए।
प्रश्न 2: निर्जल एकादशी क्या है?
👉 निर्जल एकादशी सबसे कठिन व्रत माना जाता है, जिसमें जल तक का सेवन नहीं किया जाता।
प्रश्न 3: क्या महिलाएं और बुजुर्ग भी यह व्रत रख सकते हैं?
👉 हाँ, लेकिन यदि स्वास्थ्य समस्या हो तो केवल फलाहार करके भी व्रत का पुण्य प्राप्त किया जा सकता है।
🌸 Ekadashi Vrat 2025: निष्कर्ष
एकादशी केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह जीवन को अनुशासित करने का एक माध्यम है। उपवास से शरीर स्वस्थ होता है, मन शांत रहता है और आत्मा परमात्मा से जुड़ने का मार्ग पाती है।
आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन साधना, भक्ति और आत्मशुद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
→ अगर आप भी आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं तो एकादशी का व्रत अवश्य रखें।
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