Do Badi Sadak Pariyojanaon ko Kendra ki Manzoori: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र और ओडिशा में अहम राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है। इन परियोजनाओं से कनेक्टिविटी, सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
नई दिल्ली – देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। हाल ही में दो बड़ी सड़क परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है, जिनका सीधा लाभ महाराष्ट्र और ओडिशा को मिलेगा। इन परियोजनाओं से न केवल यात्रा सुविधा बेहतर होगी, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
सरकार का स्पष्ट फोकस है कि आधुनिक और सुरक्षित सड़क नेटवर्क के ज़रिये देश के अलग-अलग हिस्सों को तेज़ी से जोड़ा जाए।
Do Badi Sadak Pariyojanaon ko Kendra ki Manzoori: महाराष्ट्र में बनेगा 374 किमी लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर
महाराष्ट्र में एक बड़ी ग्रीनफील्ड सड़क परियोजना को मंज़ूरी दी गई है, जिसे बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग ₹19,142 करोड़ की लागत आने का अनुमान है।
इस योजना के तहत 374 किलोमीटर लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर तैयार किया जाएगा, जिसे नासिक–सोलापुर–अक्कलकोट कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। यह कॉरिडोर नासिक, अहिल्यानगर और सोलापुर जैसे प्रमुख क्षेत्रीय शहरों को जोड़ते हुए महाराष्ट्र की आंतरिक और बाहरी कनेक्टिविटी को मज़बूत करेगा।
इस सड़क के बनने से यात्रा का समय घटेगा, लॉजिस्टिक्स और परिवहन व्यवस्था सुधरेगी और औद्योगिक व कृषि उत्पादों की आवाजाही अधिक सुचारु हो सकेगी। साथ ही, इससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है।
Do Badi Sadak Pariyojanaon ko Kendra ki Manzoori: ओडिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण से बढ़ेगी सड़क सुरक्षा
ओडिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग-326 के एक महत्वपूर्ण हिस्से को दो लेन में अपग्रेड करने की मंज़ूरी दी गई है। यह परियोजना ईपीसी मॉडल पर आधारित होगी, जिसमें निर्माण गुणवत्ता और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस मार्ग के विकसित होने से दुर्घटनाओं में कमी आने, यात्रा को सुरक्षित बनाने और स्थानीय लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, यह सड़क ओडिशा के अंदरूनी इलाकों को प्रमुख राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
Do Badi Sadak Pariyojanaon ko Kendra ki Manzoori: आर्थिक विकास और रोज़गार को मिलेगा बढ़ावा
इन दोनों सड़क परियोजनाओं का असर केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और परियोजनाओं के पूरा होने के बाद परिवहन लागत में कमी आएगी। इससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क निवेश को आकर्षित करता है और राज्यों के समग्र विकास में तेज़ी लाता है।
हाल के अध्ययन और सरकार के आधिकारिक बयानों के अनुसार, सड़क बुनियादी ढांचे के विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देखा जा रहा है। भारत में कुल सड़क नेटवर्क विश्व के सबसे बड़े नेटवर्कों में से एक है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की आवश्यकता लगातार महसूस होती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स, विशेष रूप से BOT और EPC मॉडल पर, न केवल निर्माण की गति और वित्तीय निष्पादन को प्रभावी बनाते हैं बल्कि जोखिम विभाजन, निजी क्षेत्र की भागीदारी और दीर्घकालिक रखरखाव को भी सुनिश्चित करते हैं। यह व्यापक अध्ययन दर्शाता है कि मजबूत सड़क नेटवर्क सीधे आर्थिक वृद्धि, निवेश, औद्योगिक विकास और ग्रामीण इलाकों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ा है।
Do Badi Sadak Pariyojanaon ko Kendra ki Manzoori: दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति का हिस्सा
ये दोनों परियोजनाएँ सरकार की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को आधुनिक और सुरक्षित बनाया जा रहा है। लक्ष्य है एक ऐसी परिवहन व्यवस्था तैयार करना, जो तेज़, टिकाऊ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र और ओडिशा में स्वीकृत ये सड़क परियोजनाएँ कनेक्टिविटी सुधारने के साथ-साथ आर्थिक विकास, रोज़गार सृजन और सड़क सुरक्षा को भी नई दिशा देंगी। आने वाले वर्षों में इनका असर ज़मीन पर साफ़ तौर पर देखने को मिल सकता है।
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