Asia Biggest Navgrah Mandir Dabra Gwalior: ग्वालियर से 46 किमी दूर डबरा में स्थित एशिया का सबसे बड़ा नवग्रह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यहां सभी नौ ग्रहों के अलग-अलग मंदिर एक ही परिसर में बने हैं, जहां ग्रह शांति और समृद्धि के लिए पूजा की जाती है।
Asia Biggest Navgrah Mandir Dabra Gwalior: आस्था, वास्तुकला और ज्योतिष का संगम
मध्यप्रदेश के ग्वालियर से लगभग 46 किलोमीटर दूर डबरा में स्थित नवग्रह मंदिर आज देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन चुका है। इसे एशिया का सबसे बड़ा नवग्रह मंदिर माना जाता है। सफेद संगमरमर से निर्मित यह भव्य मंदिर दूर से ही अपनी विशालता और दिव्यता के कारण मन को मोह लेता है।
यह मंदिर केवल पूजा का स्थान ही नहीं, बल्कि ज्योतिष, आध्यात्म और भारतीय परंपरा का अद्भुत संगम है। यहां आने वाले श्रद्धालु अपने जीवन में ग्रहों से जुड़ी बाधाओं को दूर करने, शांति और समृद्धि की कामना लेकर आते हैं।
🌞Asia Biggest Navgrah Mandir Dabra Gwalior: नवग्रहों की एक साथ पूजा का दुर्लभ अवसर
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां नौ ग्रहों—सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु—के लिए अलग-अलग मंदिर बनाए गए हैं। खास बात यह है कि सभी मंदिर आपस में जुड़े हुए हैं, जिससे श्रद्धालु एक ही परिसर में क्रमवार सभी ग्रहों के दर्शन कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवग्रहों की संयुक्त पूजा से जीवन में संतुलन, सफलता और मानसिक शांति प्राप्त होती है। ज्योतिष शास्त्र में भी नवग्रहों को मानव जीवन के सुख-दुख का प्रमुख कारण माना गया है।
Asia Biggest Navgrah Mandir Dabra Gwalior: प्रसिद्ध नवग्रह मंत्र
मंदिर में पूजा के दौरान श्रद्धालु अक्सर यह प्रसिद्ध नवग्रह मंत्र भी जपते हैं —
“ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥”
इस मंत्र का अर्थ है कि सभी ग्रह शांत होकर जीवन में सुख और मंगल प्रदान करें।
Asia Biggest Navgrah Mandir Dabra Gwalior: भव्य वास्तुकला और आध्यात्मिक वातावरण
मंदिर की वास्तुकला अत्यंत आकर्षक और आधुनिक तकनीक से युक्त पारंपरिक शैली में बनी है। विशाल प्रांगण, ऊंचे शिखर, संगमरमर की नक्काशी और साफ-सुथरा परिसर इसे विशेष बनाते हैं।
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय मंदिर का दृश्य अत्यंत मनोहारी हो जाता है, जब सूर्य की किरणें सफेद पत्थर पर पड़कर मंदिर को स्वर्णिम आभा प्रदान करती हैं।
यहां का शांत वातावरण ध्यान और साधना के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।
क्यों विशेष है, डबरा का यह नवग्रह मंदिर?
- एशिया का सबसे बड़ा नवग्रह मंदिर माना जाता है
- सभी नौ ग्रहों के अलग-अलग मंदिर एक ही परिसर में
- मंदिर आपस में जुड़े हुए हैं — एक साथ दर्शन संभव
- विशाल और सुंदर संगमरमर निर्माण
- ज्योतिषीय उपाय और ग्रह शांति पूजा के लिए प्रसिद्ध
श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था
देश के विभिन्न राज्यों से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से शनिवार, अमावस्या, ग्रहण काल और ज्योतिषीय योगों के समय यहां बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।
कई लोग अपने जीवन में चल रही परेशानियों—जैसे शनि दोष, राहु-केतु दोष, विवाह में बाधा, आर्थिक संकट या स्वास्थ्य समस्याओं—से मुक्ति की कामना लेकर यहां पूजा करवाते हैं।
कैसे पहुंचें?
डबरा, ग्वालियर जिले के पास स्थित एक प्रमुख नगर है और सड़क व रेल दोनों मार्गों से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
- ग्वालियर से दूरी: लगभग 46 किमी
- नजदीकी रेलवे स्टेशन: डबरा
- सड़क मार्ग से सीधी बस और टैक्सी सुविधा उपलब्ध
निष्कर्ष
डबरा का नवग्रह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, वास्तुकला और ज्योतिषीय परंपरा का अद्वितीय संगम है। यहां एक साथ नौ ग्रहों की पूजा करने का अवसर इसे पूरे भारत में विशेष बनाता है।
जो भी श्रद्धालु जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की कामना रखते हैं, उनके लिए यह मंदिर अवश्य दर्शन करने योग्य है।
ऐसी ही Informative खबरों के लिए पढ़ते रहिए —
Dabang Khabar, dabangkhabar.com पर।

