Dhurandhar Box Office Report 15ve Din Tak: धुरंधर फिल्म की रिलीज़ डेट 5 दिसंबर 2025 से अब तक का पूरा बॉक्स ऑफिस सफर। रणवीर सिंह, संजय दत्त और आर. माधवन स्टारर इस फिल्म की कहानी, सेंसर बदलाव, रिकॉर्ड कलेक्शन और दर्शकों की प्रतिक्रिया की विस्तृत जानकारी पढ़ें।
Dhurandhar Box Office Report 15ve Din Tak: Dhurandhar Movie Review & Box Office Journey- रिलीज से अब तक की पूरी कहानी
5 दिसंबर 2025 को जब Aditya Dhar के निर्देशन में बनी फिल्म ‘धुरंधर’ सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई, तब शायद किसी ने यह अंदाज़ा नहीं लगाया था कि यह फिल्म कुछ ही हफ्तों में बॉलीवुड बॉक्स ऑफिस के इतिहास में नया अध्याय जोड़ देगी। Jio Studios और B62 Studios के बैनर तले बनी यह फिल्म सिर्फ एक एक्शन-थ्रिलर नहीं, बल्कि सत्ता, साजिश, बलिदान और देश के भीतर छिपे खतरों की परतें खोलने वाली कहानी बनकर सामने आई।
Dhurandhar Box Office Report 15ve Din Tak: कहानी – एक मिशन ओर कई साजिशें
फिल्म की कहानी अजय सान्याल (आर. माधवन) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भारत पर पाकिस्तान की ओर से हुए कई घातक हमलों का गवाह रहा है। देश पर लगातार हो रहे हमलों के बीच अजय सान्याल (आर. माधवन) यह समझने लगता है कि आतंक से लड़ाई सिर्फ जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रह सकती। हर बार हमला होने के बाद जांच, बयान और कूटनीतिक प्रक्रियाएं चलती हैं, लेकिन आतंक के नेटवर्क ज्यों के त्यों बने रहते हैं। सिस्टम की सीमाएं, अंतरराष्ट्रीय दबाव और राजनीतिक मजबूरियां उसे खुलकर निर्णायक कदम उठाने से रोकती हैं। इसी भीतर ही भीतर पनपती बेबसी और अधूरे रह गए अभियानों के अनुभव से जन्म लेता है, एक गुप्त मिशन – “धुरंधर”।
यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं होता, बल्कि महीनों की खुफिया रिपोर्ट्स, सीमा पार से चल रहे फंडिंग चैनल, नकली नोटों के नेटवर्क और छिपे हुए आतंकी सेल्स की जानकारी को जोड़कर तैयार किया गया एक प्लान होता है। जब यह साफ हो जाता है कि आतंक को उसकी जड़ों तक पहुंचकर ही रोका जा सकता है, तब ‘धुरंधर’ को सक्रिय किया जाता है-एक ऐसा मिशन, जो आधिकारिक फाइलों से बाहर रहकर देश की सबसे खामोश, लेकिन सबसे खतरनाक लड़ाई लड़ने के लिए बनाया गया है।
इस मिशन की कमान मिलती है हमज़ा अली मज़ारी (रणवीर सिंह) को, जो एक RAW एजेंट है। हमज़ा को पाकिस्तान में घुसकर आतंक के नेटवर्क को तोड़ना है। उसका रास्ता जाता है कुख्यात गैंगस्टर रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) तक, जिसकी पकड़ आतंक और राजनीति-दोनों में है।
हमज़ा, दूसरे जासूस आलम (गौरव गेरा) की मदद से रहमान के गिरोह में घुसता है और धीरे-धीरे उसका भरोसेमंद बन जाता है। इसी बीच राजनीतिक चालें चल रहे जमील जमाली (राकेश बेदी) और एसपी असलम चौधरी (संजय दत्त) हालात को और खतरनाक बना देते हैं।
कहानी उस मोड़ पर पहुंचती है जहां हमज़ा रहमान की जान बचा लेता है, लेकिन उसे यह अहसास नहीं होता कि यही फैसला आगे चलकर उसके देश के लिए एक बड़ी तबाही का कारण बनने वाला है।
Dhurandhar Box Office Report 15ve Din Tak: अक्षय खन्ना का सरप्राइज़ और रणवीर का ट्रांसफॉर्मेशन
फिल्म में रणवीर सिंह पूरी तरह अपने किरदार में ढले हुए नजर आते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज, आंखों की बेचैनी और एक जासूस की मानसिक थकान-सब कुछ बहुत वास्तविक लगता है।
अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत के रूप में फिल्म को एक अलग ही ऊंचाई दी है। उनका डांस सीक्वेंस, जिसे उन्होंने खुद improvise किया, आज भी चर्चा में है। शूटिंग के दौरान ऑक्सीजन लेवल गिरने के बावजूद उनका सीन पूरा करना, उनके dedication को दिखाता है।
संजय दत्त का किरदार सत्ता के अंधेरे चेहरे को दर्शाता है, जबकि आर. माधवन की भूमिका कहानी की भावनात्मक रीढ़ बनती है।
Dhurandhar Box Office Report 15ve Din Tak: सेंसर बोर्ड और बदलाव
‘धुरंधर’ को भारत में ‘A’ सर्टिफिकेट मिला। वजह थी फिल्म में दिखाया गया तीखा और रॉ violence। CBFC के निर्देश पर कई violent visuals कम किए गए, एक मंत्री के किरदार का नाम बदला गया और एक cuss word mute किया गया।
डिस्क्लेमर को हिंदी voiceover के साथ लंबा किया गया और anti-drug, anti-smoking disclaimers जोड़े गए। एंड क्रेडिट्स में अतिरिक्त सीन और म्यूज़िक भी सेंसर प्रक्रिया के दौरान शामिल किए गए।
Dhurandhar Box Office Report 15ve Din Tak: बॉक्स ऑफिस- आंकड़े जो इतिहास बन गए
‘धुरंधर’ ने रिलीज़ के पहले हफ्ते में ही ₹207.25 करोड़ की कमाई कर ली थी। असली हैरानी तब हुई जब दूसरे हफ्ते फिल्म ने ₹253 करोड़ का कलेक्शन किया-जो पहले हफ्ते से भी ज्यादा था। ऐसा बहुत कम फिल्मों के साथ होता है।
दूसरे हफ्ते के अंत तक फिल्म ने:
- Pathaan (₹446.2 करोड़)
- Gadar 2 (₹419.1 करोड़)
को पीछे छोड़ दिया।
15वें दिन तक फिल्म का कुल कलेक्शन ₹463.48 करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि तीसरे हफ्ते की शुरुआत धीमी रही और दिन 15 पर फिल्म ने करीब ₹2.98 करोड़ कमाए, लेकिन तब तक ‘धुरंधर’ अपना काम कर चुकी थी। Income Source: sacnilk
दर्शकों से कनेक्शन
‘धुरंधर’ सिर्फ बड़े action sequences या स्टार पावर की वजह से नहीं चली। दर्शकों को इस फिल्म में conflict, guilt, loyalty और choices की कीमत दिखाई दी। यही वजह है कि यह फिल्म युवाओं से लेकर गंभीर सिनेमा पसंद करने वालों तक, सबको जोड़ पाई।
निष्कर्ष
‘धुरंधर’ उन फिल्मों में शामिल हो गई है जो सिर्फ बॉक्स ऑफिस नंबर नहीं, बल्कि एक समय की सोच और माहौल को भी दर्शाती हैं। ‘धुरंधर’ किसी जश्न के साथ समाप्त नहीं होती। न कोई तिरंगा लहराता है, न तालियों की उम्मीद की जाती है। फिल्म वहां खत्म होती है, जहां सवाल शुरू होते हैं। यह उस सच्चाई को सामने रखती है जिसे अक्सर पर्दे के पीछे छोड़ दिया जाता है-कि आतंक सिर्फ सरहद के उस पार से नहीं आता, वह नकली नोटों, राजनीति की सौदेबाज़ी और सत्ता के संरक्षण के रास्ते हमारे भीतर तक घुस आता है।
हमज़ा जैसे एजेंट जब किसी एक नेटवर्क को बचाने या तोड़ने का फैसला लेते हैं, तो वह फैसला सिर्फ एक आदमी या एक मिशन तक सीमित नहीं रहता। वह देश की अर्थव्यवस्था, चुनावों की शुचिता और आम आदमी की सुरक्षा तक असर डालता है। फिल्म यह एहसास कराती है कि कई बार देश को बचाने के लिए ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जिनका बोझ जिंदगी भर उठाना पड़ता है-और जिनकी कोई गवाही नहीं होती।
‘धुरंधर’ हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जो लड़ाई हमें दिखाई देती है, वह असली नहीं होती। असली लड़ाई उस अंधेरे में लड़ी जाती है, जहां भारतीय एजेंट्स बिना नाम, बिना पहचान, सिर्फ एक फाइल नंबर बनकर काम करते हैं। फिल्म खत्म हो जाती है, लेकिन यह एहसास छोड़ जाती है कि अगला हमला, अगला नोट, अगला सौदा – कहीं न कहीं अभी भी चल रहा है। और शायद इसी का नाम ‘धुरंधर’ है।
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